ब्रह्मांड लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ब्रह्मांड लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 1 सितंबर 2020

बुध saurmandal me buddh grah

बुध 

बुध सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है । 

बुध सूर्य का सबसे निकट का ग्रह है ,जिसके कारण यह सूर्य के निकलने  के 2 घंटे पहले दिखाई देता है । 



बुध सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय (88 दिन )में पूरी कर लेता है । 

बुध का एक दिन ,पृथ्वी के 90 दिनों  के बराबर होता है और इतने ही समय की एक रात होती है । बुध अपने दीर्घवृतीय कक्ष में 1,76,000 किमी प्रति घंटे की गति से घूमता है । इसकी यही गति इसे सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की पकड़ से सुरक्षित रखती है । 

बुध का कोई अपना उपग्रह नहीं है । 

 बुध पर वायुमंडल नहीं होने से वहाँ जीवन संभव नहीं है । 

बुध का व्यास 4,878किमी है । 

बुध का द्रव्यमान  3.64*1020 टन (3.3 *10 की घात 23 किग्रा ॰ ) है जो की पृथ्वी का लगभग 5.5% है । 

बुध का आयतन पृथ्वी के आयतन का लगभग 6% है ,यानि 2.15 *10की घात  21 घन मीटर  

बुध चंद्रमा से थोड़ा सा बड़ा है । 

बुध का परिभ्रमण समय 58.6 दिन है यानि यह अपने अक्ष के चारों ओर 58.6 दिनों में एक चक्कर पूरा करता है । 

बुध का परिक्रमण समय  88 दिन है ।


 

इसकी सूर्य से अधिकतम दूरी 43 मिलियन मील (70 मिलियन किमी ) है और न्यूनतम दूरी 39 मिलियन मील (46.5 मिलियन किमी ) है । 

बुध की पृथ्वी से अधिकतम दूरी 142.6 मिलियन मील (229.4मिलियन किमी )है और न्यूनतम  दूरी49.6 मिलियन मील (79.8 मिलियन किमी ) है । 

इसका धरातलीय गुरुत्व 11.8फिट /से ॰ है । 

तापमान -2800 से 8800 F (-175 0 से 425 0 )

धरारतलीय वायुदाव  2 * 10की घात  2  मिलीबार है । 

यह वर्ष में तीन बार सुबह और शाम के तारे के रूप मे दिखाई देता है । इसका कारण इसकी साइनडिक अबधी  (synadic period) का 116 दिन होना है 

इसे सूर्य के निकलने के 2 घंटे पहले देखा जा सकता है । 

इसे भी शुक्र की तरह सुबह और शाम का तारा कहा जाता है क्योंकि ये दोनों ग्रह सूर्य और पृथ्वी के बीच में है । 

रविवार, 30 अगस्त 2020

सूर्य surya ki visheshata

 सूर्य


सौरमंडल का प्रधान सूर्य को माना जाता है । 

सौरमंडल के समस्त ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत  सूर्य है । 

सूर्य की ऊर्जा नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के कारण उत्पन्न होती है । 


सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर घूमता है । 

सूर्य पृथ्वी से 3 लाख 30 हजार गुना भारी  है । 

सूर्य की आयु 5 बिलियन वर्ष है । सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है । 

सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का अनुमानित समय 10 पर घात  11 वर्ष है । 

सूर्य का आंतरिक दीप्तिमान सतह  प्रकाशमंडल  कहलाता है । 

सूर्य हमारी पृथ्वी से 14.96 करोड़ किमी॰  दूर है । 

सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 8 मिनट 26.6 सेकेंड समय लगता है । 

प्रकाश की गति 300000000 मीटर/सेकेंड है । 

सूर्य  हमारी मन्दाकिनी  दुग्धमेखला के केंद्र से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष दूर है । 



सूर्य  250 किलो मीटर/सेकेंड की गति से 25 करोड़ वर्ष में दुग्धमेखला के केंद्र के चारो ओर नाभिकीय परिक्रमा  करता है । इस अबधि को ब्रह्मांड वर्ष या कास्मिक वर्ष कहते हैं । 

सूर्य का मध्य भाग 25 दिन में और ध्रुवीय भाग 35 दिन में एक घूर्णन करता है । सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किमी है और यह पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना है । 

हमारी पृथ्वी को सूर्य के ताप का 2 अरबवा भाग ही मिलता है । 

 सूर्य के रासायनिक संरचना में हाइड्रोजन 71%, हीलियम 26.5% एवं अन्य तत्व 2.5% होता है 


सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000० C है 

सूर्य के केंद्रीय भाग 'क्रोड' Crore)का तापमान 1.5 *10 7 ॰C है । 

उत्तरी ध्रुब पर सौर ज्वाला को औरोरा  बोरियलिस कहा जाता है । 

दक्षणी ध्रुब पर सौर ज्वाला को औरोरा औस्ट्रेलिस  कहा जाता है । 

 सूर्य से प्रसारित होने वाले परवर्तित प्रकाश को अल्बिडो  कहा जाता है 


सूर्य ग्रहण के समय  जो सूर्य का भाग दिखाई देता है ,उसे कोरोना या किरीट कहते हैं । कोरोना का तापमान 2700,000 ॰ C होता है । कोरोना को सूर्य का मुकुट कहा जाता है । 




जब पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है ,तब हमारी पृथ्वी को प्रकाश सूर्य के कोरोना से ही प्राप्त होता है 


सूर्य के कोरोना से बाहर की ओर प्रवाहित होने वाली प्रोटोन की धाराओं को सौर पवन कहते हैं 



सूर्य में स्थित काले धब्बों का एक पूरा चक्कर 22 वर्षों में होता है ,पहले के 11 वर्षों में ये धब्बे बढ़ते हैं , और बाद के 11 वर्षों में ये धब्बे घटते हैं । 


सूर्य में चमकीले धब्बे को प्लेजेस कहतें हैं जबकि काले धब्बे को सौर कलंक कहा जाता है । 

सूर्य की बाहरी पवन को संवाहनिय मेखला कहा जाता है ।


सूर्य की परिभ्रमन गति के कारण सौर्यिक पवने सर्पीलाकार चलती है । 



शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

सौरमंडल के आंतरिक और बाह्य ग्रह /पिंडsaurmandal ke antrik aur bahy grah

 सौरमंडल के ग्रह /पिंड 

ग्रह (planet)-सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने वाले आकाशीय पिंडो को हम ग्रह कहते है । ग्रहों के पास पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल होता है जिससे की वह अपना गोल स्वरूप ग्रहण करतें है । इनके पास अपना प्रकाश नहीं होता है । ये सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं । 

सौरमंडल के ग्रह -(सूर्य से बढ़ती दूरी के अनुसार)- 1-बुध (mercury), 2- शुक्र (venus) 3-पृथ्वी (Earth) 4-मंगल (mars) 5- बृहस्पति (jupiter) 6-शनि (saturn) 7-अरुण (uranus) और वरुण (neptune)। 

बौने ग्रह - प्लूटो ,चेरान ,सेरस 


ग्रहों को दो भागों मे विभाजित किया गया है ।



 

1-आंतरिक ग्रह अथवा पार्थिव ग्रह (inner or terrestrial );पृथ्वी के सदृश होने से इन ग्रहों को आंतरिक या पार्थिव श्रेणी मे रखा जाता है -बुध ,शुक्र ,मंगल एवं पृथ्वी । ये ग्रह सूर्य के निकट है । 

2 बाह्य ग्रह अथवा बृहस्पति ग्रह (outer or joveam planet) ;ये ग्रह सूर्य से दूर है -बृहस्पति ,शनि ,अरुण और वरुण । 


क्या आपको पता है की अंतराष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय  संघ (international astronomical unio) द्वारा 24 अगस्त ,2006 ई ॰ को चेक गणराज्य की राजधानी प्राग के सम्मेलन -2006 मे ग्रहों की परंपरागत परिभाषा मेन जोड़ा गया आकाशीय पिंडों की भरमार न हो और इसी सम्मेलन में यम (pluto) को प्राप्त 'परम्परागत ग्रह ' की मानिता समाप्त कर दी गयी और इसे 'बौने ग्रह ' की श्रेणी में शामिल कर दिया गया । 

गुरुवार, 27 अगस्त 2020

saurmandal kya hai सौरमंडल क्या है

सौरमंडल

saurmandal ka chitra

 

सूर्य एवं इसके चारो ओर परिक्रमा करने वाले समस्त ग्रहों , उपग्रहों , छुद्रग्रहों  एवं अन्य  आकाशीय पिंड के समूह को सौरमंडल कहते हैं 

सौरमंडल के परिवार का मुखिया सूर्य को माना जाता है

पहले सौरमंडल में नौ (9) ग्रह थे ।

saurmandal me prithvi


बुध ,शुक्र ,पृथ्वी ,मंगल ,वृहस्पति ,शनि ,अरुण ,वरुण और यम (plouto)

2006 ई ॰ में अंतराष्ट्रीय खगोल शास्त्रीय संघ (IAU) द्वारा यम की ग्रह वाली मान्यता समाप्त कर दी गई इसके बाद से ग्रह की संख्या  आठ (8) रह गई है । 

सभी ग्रह अपनी-अपनी  कक्षा में सूर्य की  परिक्रमा करते हैं और अपनी-अपनी धुरी (अक्ष) पर भी घूमती है।

सौरमंडल में सबसे बड़ा ग्रह वृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध हैं । 


सूर्य के सबसे दूर का ग्रह वरुण है जबकि सबसे निकट का ग्रह बुध है। 

 पृथ्वी का सबसे निकट का ग्रह शुक्र (Venus)है । 

सबसे ठंढा ग्रह वरुण(Neptune) है । 

पृथ्वी की बहन शुक्र को कहा जाता है । 

कारला को नौवाँ ग्रह कहा जाता है । 

सबसे अधिक चमकीला ग्रह शुक्र और सबसे अधिक  चमकीला तारा साइरस तारा (Dog star) है । 

साइरस की आकृति सूर्य से 20 गुना अधिक है और पृथ्वी से 9 प्रकाश वर्ष दूर है । 

वर्तमान में तारामंडल की संख्या 89 है, जिनमें हाइड्रा नामक तारामंडल सबसे बड़ा है । 


घटते आकार  के अनुसार ग्रहों के क्रम हैं -

वृहस्पति ,शनि ,अरुण ,वरुण ,पृथ्वी ,शुक्र ,मंगल ,एवं बुध । 


सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रह का क्रम -

बुध ,शुक्र ,पृथ्वी ,मंगल ,वृहस्पति ,शनि ,अरुण और वरुण । 


8 ग्रहों में से केवल 5 ग्रहों को नंगी आँखों से देखा जा सकता है -बुध ,शुक्र शनि, वृहस्पति और मंगल । 


''भोर का तारा ''  शुक्र को कहा जाता है । 

''सांझ का तारा''   शुक्र को कहा जाता है । 

पृथ्वी को   ''नीला ग्रह ''   कहा जाता है । 

मंगल को   ''लाल ग्रह ''    कहा जाता है ।   

सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह ''गेनीमेड '' को माना जाता है । और सबसे छोटा उपग्रह ''डीमोस ''को माना जाता है । 

सबसे अधिक उपग्रहों (63)वाला ग्रह वृहस्पति है 


शुक्र और अरुण अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमती है और अन्य ग्रह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है । 

                                Thanks for visit

शुक्रवार, 19 जून 2020

(आकाशीय पिंड) मन्दाकिनी ,सूर्य ,निहारिका ,ग्रह ,उपग्रह ,क्षुद्र ग्रह और एरावत akashiy pind kshudra grah mandakini niharika in hindi

  आकाशीय पिंड (Celestial Bodies)

 मंदाकिनी (Galaxy)-

  👉तारों के विशाल समूह को मंदाकिनी कहते हैं । एक मंदाकिनी में अरबों तारें होते हैं । 
  ब्रह्मांड मे करोड़ों मंदाकिनियों हैं ।

  👉हमारी पृथ्वी और सूर्य की मंदाकिनी को दुग्ध मेखला अथवा आकाश गंगा  (Milky Way) कहते हैं । 
  आकाश गंगा का 80% भाग सर्पीला है ।

 👉आकाशगंगा को रात में देखा जा सकता है ,यह उत्तर से दक्षिण दिशा  में एक बहती हुई नदी की तरह   दिखाई देती है । 

👉हमारी आकाशगंगा के समीप वाली  एक अन्य मंदाकिनी देवयानी (Andromeda) है । 


  👉एक नया मंदाकिनी की खोज हुई है, जिसका नाम है -   ड्वार्क मंदाकिनी

              👉तारे के समूह को यूरोप में मिल्की -वे (Milky Way)

, यूनान में गैलेक्सी (Galaxy) और भारत मेंआकाशगंगा अथवा मंदाकिनी कहा जाता है । 
              
  सूर्य(Sun)  
                  पृथ्वी के सबसे निकट का तारा सूर्य है । सूर्य के बाद दूसरा निकट का तारा  ''प्रोक्सिमा सेंचुरी''   है ,इसकी दूरी  पृथ्वी से 4.22  प्रकाश वर्ष है ।सौरमंडल में सर्वाधिक चमकीला तारा साइरस है , इसे डॉग   (Dog Star)  भी  कहतें  हैं । यह  सूर्य से लगभग 25 गुना चमकीला , 2.35 गुना बड़ा और 543864 गुना दूर   है । 

 ध्रुवतारा (Polar Star) 
 यह तारा उत्तर दिशा में चमकता हुआ दिखाई पड़ता है । पुराने समय में नाविक रात्री के समय इसी तारा   को देख कर दिशा का पता लगते थे ।

                     
 निहारिका (Nebula)
 धूलकण और गैस से बना हुआ बादल जिसमें करोड़ों तारों  का  विशाल  गुच्छा (Cluster of Star)  होता है   निहारिका  कहलाता  है ।  यह  अत्यधिक  चमकीला  इसके नाभिक में अत्यधिक प्रज्वलनशील गैसें होने   के कारण होता है  
                                                          
कुछ प्रमुख निहारिकाएं हैं -लाइरा ,आरियन ,विनोटीसी ,केनिस 


  ग्रह (Planets)
  तारों की परिक्रमा करने वाली आकाशीय पिण्डो को ग्रह (Planets) कहते हैं । 

 ग्रह का अपना प्रकाश नहीं होता है ,वो तारों के प्रकाश में शीशे की तरह  चमकता है । 



  उपग्रह(Satellite)
  ग्रह की परिक्रमा करने वाले आकाशीय पिंड को उपग्रह(Satellite) कहतें हैं । इसके पास भी अपना     प्रकाश नहीं होता है । 


 क्षुद्र ग्रह (Asteroids)
  मंगल और वृहस्पति के जैसे बड़े ग्रहों के बीच में कई छोटे-छोटे ग्रह मौजूद है , जिन्हें क्षुद्र ग्रह कहा जाता है 


 एरावत पथ
  हमारी पृथ्वी समेत पूरा सौरमंडल जिस आकाशगंगा में स्थित है  एरावत पथ कहलाता है । 
                  

गुरुवार, 18 जून 2020

ब्रह्मांड क्या है brahmand kya hai hindi me

                                                               ब्रह्मांड (Universe )


ब्रह्मांड क्या है ?

जहां सूर्य तारे चंद्रमा ग्रह नक्षत्र धूमकेतू और अन्य आकाशीय पिंड जहां  समाहित  है या विचरण करते हैं ब्रह्मांड कहलाते  हैं  । 

ब्रह्मांड के दो भाग है। 
 1 ॰ वायुमंडल 
2 ॰ अंतरिक्ष 
वैज्ञानिक सोच के अनुसार ब्रह्मांड उत्पत्ति के प्रमुख  कारण हैं । 
1॰ महाविस्फोट सिद्धांत(Big Bang Theory )
                                       2 ॰ सतत सृस्टि  सिद्धांत 
                             3 ॰ स्फीति सिद्धांत (Inflationary )
                             4 ॰ दोलन सिद्धांत (Oscilatiry or PulsatingTheory )

    1 ॰ महाविस्फोट सिद्धांत (Big-Bang Theory )-;

बेल्जियम  के  खगोलज्ञ , वैज्ञानिक  एवं  पादरी  ऐब  जार्ज  लिमेतरी   ने  इस  सिद्धांत  को दिया ।  इनके सिद्धांत  के अनुसार  12  से 14 अरब वर्ष  पहले   यह  ब्रह्मांड  बहुत ही  घनी  अवस्था  मे था , तब एक महाविस्फोट हुआ , इस महाविस्फोट से ब्रह्मांड का जन्म हुआ । 
महाविस्फोट से बहुत ही अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन हुआ । 
धमाके के मात्र 1.43 सेकेंड में अंतरिक्ष की स्थिति बर्तमान वाली अंतरिक्ष की जैसी हो गई । 
महाविस्फोट के 10.5 अरब वर्ष  बाद, यानि अभी से 4.5 अरब वर्ष पहले सौरमंडल का विकास हुआ । 
  
     2 ॰ सतत सृस्टि सिद्धांत ;-
प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थामस गोल्ड एवं हर्मन बाँडी ने 1948 में इस सिद्धांत को दिया ।  ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हायल ने भी इस सिद्धांत का समर्थन किया । 
इसके अनुसार आकाश गंगा दूर तो हो रही है लेकिन अंतरिक्ष का घनत्व न ही घट रहा  है और न ही बढ़ रहा है   । 
एक -दूसरे से दूर होने से उत्पन्न रिक्त स्थान नए आकाशगंगा बनेगी ,जो नये  पदार्थ से बनेगी । 

   3 ॰ स्फीति सिद्धांत (Inflationary Theory );-
      अलेन गुथ ने दिया । 

  4 ॰ दोलन सिद्धांत (Oscilation or Pulsating Theory );-
        डा ॰ एलन एंडेज ने दिया । 


  God Partical ;-

 ब्रह्मांड के रहस्य के बारे में पता लगाने के लिए यूरोपियन सेंटर फार न्यूक्लियर रिसर्च (CERN ) ने 30 मार्च , 2010 को जेनेवा में पृथ्वी के 50 से 175 मीटर नीचे 27.36 किमी लंबी सुरंग में हैड्रन कोलाइजर (LHS ) का सफल प्रयोग किया । 
इस प्रयोग में प्रोंटोन बीमों को लगभग प्रकाश की गति से टकराया गया ,इस प्रक्रिया में हिग्स बोसॉन का निर्माण हुआ ,जिसे God Partical कहा गया ।   

  

Munger se Bhagalpur marine drive

 मुंगेर से भागलपुर तक बनने वाला मरीन ड्राइव बिहार की एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना है। यह परियोजना पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर तैयार की जा...